Saturday, January 30, 2010

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How do we Celebrate Parents Worship Day?

  1. Children worship their parents by putting Tilak, offering flowers & bowing to the parents. Parents put Tilak on children & bless them. Experience the God residing inside one another. The blessings of parents bring goodness to the children.
  2. Parents tell the stories of devotees of parents like Ganesha, Pundalik, Shravana Kumar etc. 
  3. Children can also perform some play on these devotees eg. Children can enact as Lord Ganesha to worship his/her parents as Shiva-Parvati.
  4. All children take pledge: “I shall respect my parents & teachers. It is my duty to obey those commands which aim at making me great and I shall surely do it.”
  5. Children sing songs filled with devotion towards parents like:”Mata-Pita-Guru Charano Me” (cassette: Bhajan Deepanjali, VCD: Sanskar Darshan, MP3 given above) or “Bhoolo sabhi ko tum magar…” (leaflets available as ashram given above)
  6.  Distribute sweets to children after singing “Shri Asaramayana Yog Lila” or Aarti.
  7. If possible, do such event at a community hall where Posters depicting slogans of Parents Devotion can be put up. 
  8. Parents distribute books like “Bal-Sanskar”, “The Glory of Eternal Youth”, “Winsome Behaviour”, “Tu Gulab Hokar Mehak” to other children & adults in their area and they themselves read them a little daily.
  9. Read and spread this benevolent message of Pujya Bapuji whose heart is filled with nothing but the well-being of mankind.
    
कैसे मनायें मात-पितृ पूजन दिवस?
v  इस दिन बच्चे-बच्चियाँ अपने माता-पिता को प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें। संतान अपने माता पिता के गले लगे। इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा। बेटे-बेटियाँ अपने माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें।
v  बच्चे-बच्चियाँ अपने माता-पिता का तिलक, पुष्प आदि के द्वारा पूजन करें। माता-पिता भी बच्चों को तिलक करें, आशीर्वचन कहें।
v  माता-पिता का पूजन करते हैं तो काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा।
v  बालक गणेषजी की पृथ्वी परिक्रमा, भक्त पुण्डलिक की मातृ-पितृ भक्ति, श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति - इन कथाओं का पठन करें अथवा कोई एक व्यक्ति कथा सुनाये और अन्य लोग श्रवण करें।
v  इस दिन बच्चे बच्चियाँ पवित्र संकल्प करें - मैं अपने माता-पिता व गुरूजनों का आदर करूँगा/करूँगी। मेरे जीवन को महानता के रास्ते ले जाने वाली उनकी आज्ञाओं का पालन करना मेरा कर्त्तवय है और मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा/करूँगी।
v  माता-पिता बाल संस्कार, युवाधन सुरक्षा, तू गुलाब होकर महक,   मधुर व्यवहार - इन पुस्तकों को अपनी क्षमतानुरूप बाँटे बँटवायें तथा प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा स्वयं पढ़ने का तथा बच्चों से पढ़ाने का संकल्प लें। श्री गणेष, पुण्डलिक, श्रवण कुमार आदि मातृ-पितृ भक्त बालकों की कथाओं को नाटक के रूप में प्रस्तुत करें।
v  (1) मात-पिता गुरू चरणों में प्रभु... (भजन दीपांजली कैसेट से) (2) भूलो सभी को तुम मगर... ऐसे भजनों का गान करें। इस दिन सभी मिलकर श्री आसारामायण पाठ व आरती करके बच्चों को मधुर प्रसाद बाँटें। नीचे लिखी पंक्तियाँ जैसी मातृ-पितृ भक्ति की कुछ पंक्तियाँ गत्ते पर लिख कर बोर्ड बना कर आयोजन स्थल पर लगायें। 1. बहुत रात तक पैर दबाते, भरे कंठ पित आशिष पाते। 2. पुत्र तुम्हारा जगत में, सदा रहेगा नाम। लोगों के तुमसे सदा, पूरण होंगे काम। 3. मातृदेवो भव। पितृदेवो भव। आचार्यदेवो भव।
v  विश्वमंगल की कामना से भरे परम पूज्य बापू जी का परम हितकारी संदेश पढ़ें पढ़ायें। वेलेन्टाइन डे नहीं मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें।

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